Wednesday, 4 March 2020

ईश्वर-अल्लाह की हार



 ईश्वर-अल्लाह की हार 
-डॉ  राय साहब पाण्डेय
रूह काँप उठेंगी, 
आने वाली नस्लें जब पूछेंगी,
स्वर्गों-नरकों में भी,
क्या चैन तुम्हें मिल पायेगा ?

करते हो  अपमान धरम का,
अपनी दंगाई  करतूतों से,
सह सकोगे भार जमीरों पर,
क्या जिन्दा-मुर्दा लाशों का ?

शान्ति-अमन का मार्ग छोड़,
निर्दोषों की बली चढाते,
अपनों को खोने वालों के,
आँसू के मोल चुकाओगे ?

कुछ भी हासिल कर न सकोगे,
बस दंगाई बन रह जाओगे ,
राज करोगे कब तक आखिर, 
उन्मादों के हथियारों से |  

विश्वास-प्रेम के बंधन का,
मोल अगर ना समझ सके,
लानत है इस पैदाइश  की ,
तुलसी-कबीर की धरती पर |

क्या खोया उन लोगों ने,
जो जहाँ छोड़ कर चले गये,
तुम भी कवलित हो जाओगे, 
खुद सर्वनाश  अपना कर के |

तुम समझो तुम तो जीत गए, 
वो समझें  वो भी जीत गए ,
भूल गए हो आखिर दोनों, 
ईश्वर- अल्लाह क्यों हार गए ?

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