बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी -
एक अनुपम परिसर
पतित पावनी गंगा तट पर
बसी है काशी तीर्थ महान,
शंकर के त्रिशूल पर अटकी,
विश्वेश्वर खुद विराजमान |
तुलसी की लंका उपनगरी
स्थित जिसका सिंह द्वार,
काशी हिंदू विश्व विद्यालय ,
महामना का परम उपहार |
सिंह द्वार से घुसने पर ही
दिखती जिसकी छटा निराली,
तनिक ठहर कर पथिक यहाँ
अवलोकन करता है हरियाली |
प्रथम दृष्टि में प्यार हो गया
मन में एक सम्मोहन जागा ,
गर मिले प्रवेश यहाँ पढ़ने को
धन्य-धन्य हो जाय अभागा |
परिसर मध्य विश्वनाथ यहाँ हैं!
फिर दर्शन की अभिलाषा जागी,
नेत्रविहीन भक्त संग बैठ कर ,
लालसा पूर्ति हो, मन्नत माँगी |
हुआ सफल जब मिला प्रवेश
घर-परिवार हुए सब प्रफुलित ,
पहन पैंट, बोरिया-बिस्तर संग
चल पड़े, हर्षित मन आनंदित |
साइकिल रिक्शे में होकर सवार
जब छात्रावासों की अवली पकड़ी,
इधर-उधर,चक-पक,चक-पक में
आई रुइया-बिरला-ब्रोचा तिकड़ी |
ब्रोचा का बी सिक्सटी निवास
मुझे पहले से ही था आवंटित,
मिल कर अपने प्रथम दोस्त से,
पाई ख़ुशी हुआ मन आह्लादित|
हॉस्टल का वह पहला भोजन
वह कच्ची इमली वाली चटनी,
स्वादों में यूँ इस कदर बसी है
गंध बिखेरे जैसे गंधा रजनी |
हॉस्टल सीट न मिलती सबको
मेरिट की होती कठिन दरकार,
ऐसे छात्रों की परिसर के बाहर
छित्तूपूर में,बसती
बस्ती भरमार|
काया झंकृत, मन मुदित हो उठा
कुलगीत सुना जब मधुर मनोहर,
दिल में असीम श्रद्धा तब जागी
सुदृढ़ हुआ मन महामना विचार |
परिसर दर्शन की अभिलाषा लेकर
छात्रों की टोली पहुँची अस्पताल,
पहले कुलपति के नाम सुशोभित
अंकित है जो सर सुन्दर लाल |
विविध ज्ञान विज्ञान सुसज्जित
सब विषयों में पारंगत संस्थान,
देखा महामना मूल्य अनुशीलन
घूमे,पर देख न पाए कला
भवन|
आमों-महुओं-इमली के वृक्षों पर
करते हैं पक्षी नित कलरव गान,
सुशांत, मनोरम, अनुपम परिसर
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय महान|
भेषज-वनस्पति उद्यानों से होते
साँझ भये
पहुँचे हम फिर आवास,
मालवीयजी की यह कीर्ति निराली
फैला है उनके ही यश का प्रकाश |
वैज्ञानिक हों या कवि-कथाकार
इंजीनियर हो या फिर मूर्तिकार,
आलोचक, वादक या संगीतकार
जगमग परिसर, यह अर्धचद्रकार |
सौ वर्षों का इतिहास समेट यह
मना रहा अब शतवर्ष महोत्सव,
अगड़ित जन नत मस्तक होकर
गाते-सुनते महामना गाथा-गौरव |
-राय साहब पाण्डेय
महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की स्मृति में सभी भारत वासियों को समर्पित




