देखा पहली बार
बहुत
बार पहले भी सोचा था
पर
देखा पहली बार,
कैसा
लगता होगा याचना करना,
अरे
ऐसा मत करो
अभी
हिसाब मत करो
मेरी
भी कुछ मजबूरी है
उसका
भी कुछ खयाल करो |
मजबूरी
तो सबकी होती है,
अपनी
भी है
पर मैं
मजबूर नहीं,
मुझे
पैसे के बदले काम चाहिए
वक़्त
का हिसाब चाहिए,
समय का
पाबंद चाहिए |
अरे
ऐसा मत करो
मेरी
उमर का कुछ तो लिहाज करो,
चलो
माना कि कुछ कमिया होगी
पर एक
मौका तो दे दो |
आप से
ये नहीं होगा
रोज-रोज
की ये तकझक मुझे मंजूर नहीं,
मेरी
उर्जा इन व्यर्थ के वकवास में न खर्च करो
अपना
हिसाब लो और चलता बनो |
उदास चेहरा
तो पहले भी देखा था बहुत बार
पर एक
निस्सहाय शांत भाव
चेहरा देखा
पहली बार |
नौकरी छूटना
और नौकरी से बर्खास्त होना
दोनों
एक नहीं है,
एक का
पैसा गिनकर कहीं लगाना
और
दूसरी का नोट बिना गिने ही
दबे
पाँव जेब में डाल
निकाले
जाने के दंश के साथ
शामिल होते
फटेहाल बेकारों कि जमात में
जाते देखा
एक चेहरा पहली बार |
-राय साहब पांडेय







